हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के रिपोर्ट के अनुसार, क़ुम अल मुक़द्देसा मे रहने वाले भारतीय शिया धर्मगुरू, कुरआन और हदीस के रिसर्चर मौलाना सय्यद साजिद रज़वी से हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के पत्रकार ने ईरान पर अमेरीकी और इजरायली हमले से संबंधित विशेष इंटरव्यू किया। जिसमे मौलाना ने बड़े ही अच्छे और दिलचस्प रूप से जवाब दिए जिन्हे हम अपने प्रिय पाठको के लिए प्रस्तुत कर रहे है।
हौज़ाः वर्तमान युद्ध परिस्थितियों को आप किस दृष्टि से देखते हैं?
मौलाना साजिद रज़वीः वर्तमान युद्ध परिस्थितियाँ पूरी दुनिया के लिए चिंता का कारण हैं। जब भी किसी क्षेत्र में युद्ध शुरू होता है तो उसके प्रभाव केवल युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं रहते, बल्कि अर्थव्यवस्था, समाज और मानवीय जीवन के अनेक पहलू उससे प्रभावित होते हैं। ऐसे समय में सबसे अधिक आवश्यकता धैर्य, विवेक और ज़िम्मेदारी के साथ परिस्थितियों को समझने की होती है।
हौज़ा: ईरान और अमेरिका , इस्राइल की जंग कैसे शुरू हुई, इसमें कौन दोषी है?
मौलाना साजिद रज़वीः जंग की पहल और ग़ैर कानूनी तरीक़े से हमला करना अंतरराष्ट्रीय क़ानून के लिहाज़ से ग़लत है, और दुनिया ई बात की गवाह है। ज़ालिमाना और ग़ैरकानूनी हमला अमेरिका और इजराइल ने किया जबकि ईरान से एक तरफ अच्छी और सुलह की बातचीत चल रही थी। इसके जवाब में ईरान ने जो हमले किए उन्होंने अपने देश की रक्षा करते हुए किए।
हौज़ा: इस युद्ध में अब तक की क्या स्थिति है?
मौलाना साजिद रज़वीः ईरान पर हमला हों के बाद से अबतक ईरान ने अमेरिका और इज़राइल की ऐसी हालत कर दी है कि किसी न सोचा भी नहीं था। खाड़ी देश में अमेरिका के जितने भी युद्ध पोत से सब को ईरानी सैनिकों ने नष्ट कर दिया। इस समय वो जंग से भागने के रास्ता और बहाना ढूंढ रहे हैं और वे युद्ध से पीछे हटना चाहते हैं, लेकिन ईरान बिल्कुल भी तैयार नहीं हैं। इस समय युद्ध की बागडोर ईरान के हाथ में है। उन्होंने अमेरिका और इज़राइल के एयर डिफेंस सिस्टम को भी नष्ट कर दिया है, जो मिसाइलों को रोकने के लिए इस्तेमाल किया जाता था, इसलिए अब वे जब और जहाँ चाहें हमला कर देते हैं।
उन्होंने उनके कई इलाकों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि अब शायद वे लोग भविष्य में कभी इनके साथ युद्ध के बारे में सोचने की भी हिम्मत न करें।
हौज़ा: युद्ध का सबसे अधिक प्रभाव किन लोगों पर पड़ता है? ऐसे हालात में मानवीय सहानुभूति का क्या महत्व है?
मौलाना साजिद रज़वीः युद्ध का सबसे अधिक प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ता है। निर्दोष लोग अपने घरों, आजीविका और दैनिक जीवन की दिनचर्या से वंचित हो जाते हैं। बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती है, रोगियों के उपचार में कठिनाइयाँ उत्पन्न होती हैं और बहुत से परिवारों को विस्थापन के लिए मजबूर होना पड़ता है।
युद्ध के दौरान मानवीय सहानुभूति का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। प्रभावित लोगों को केवल भौतिक सहायता ही नहीं, बल्कि नैतिक समर्थन और सहानुभूति की भी आवश्यकता होती है। जब लोग एक‑दूसरे का सहारा बनते हैं तो कठिन समय भी किसी हद तक आसान हो जाता है।
हौज़ा: जनता इस समय किस प्रकार अपना योगदान दे सकती है? धार्मिक और सामाजिक नेताओं की क्या भूमिका होनी चाहिए?
मौलाना साजिद रज़वीः जनता अपनी क्षमता के अनुसार विभिन्न तरीकों से सहायता कर सकती है। कोई आर्थिक सहयोग कर सकता है, कोई आवश्यक वस्तुएँ प्रदान कर सकता है और कोई दुआ तथा नैतिक समर्थन के माध्यम से भी अपना योगदान दे सकता है।
धार्मिक और सामाजिक नेताओं की जिम्मेदारी है कि वे समाज में एकता, धैर्य और मानवता का संदेश दें और लोगों को पारस्परिक सम्मान तथा सहयोग की ओर प्रेरित करें।
हौज़ा: युद्ध में सोशल मीडिया की क्या भूमिका है?
मौलाना साजिद रज़वीः सोशल मीडिया आज के युग में सूचनाओं के तीव्र प्रसार का एक प्रभावी माध्यम है। यदि इसका उपयोग जिम्मेदारी के साथ किया जाए तो यह जागरूकता बढ़ाने और राहत कार्यों को संगठित करने में बहुत सहायक सिद्ध हो सकता है। लेकिन कुछ झूठे पत्रकार लालच में आकर ग़लत बयानी से काम लेते हैं। जबकि कुछ ऐसे भी पत्रकार हैं जिनकी भूमिका न्यायपूर्ण होती है।
हौज़ा: गलत सूचनाओं के प्रसार से क्या समस्याएँ उत्पन्न होती हैं?
मौलाना साजिद रज़वीः गलत या अप्रमाणित सूचनाएँ भय, अफवाहों और अविश्वास को बढ़ाती हैं। इसलिए आवश्यक है कि किसी भी समाचार को फैलाने से पहले उसकी पुष्टि कर ली जाए।
हौज़ा: युवाओं के लिए इस समय आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
मौलाना साजिद रज़वीः युवा समाज की शक्ति होते हैं। उन्हें भावनाओं के बजाय समझदारी, सकारात्मक सोच और रचनात्मक भूमिका को अपनाना चाहिए ताकि वे समाज के लिए उपयोगी सिद्ध हों।
हौज़ा: प्रभावित लोगों को सबसे अधिक किस चीज की आवश्यकता होती है? युद् मे उत्पन्न हुए मतभेदो को कैसे संभाला जा सकता है?
मौलाना साजिद रज़वीः युद्ध के दौरान प्रभावित लोगों को भोजन, पानी, उपचार और सुरक्षित आश्रय जैसी बुनियादी आवश्यकताओं की अत्यंत आवश्यकता होती है। इसके साथ‑साथ उन्हें मानसिक और नैतिक सहारा भी चाहिए होता है। मतभेद किसी भी समाज का स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन उसे सम्मान और सहिष्णुता के साथ संभालना चाहिए। यदि संवाद सभ्य तरीके से हो तो मतभेद भी सकारात्मक परिणाम दे सकता है।
हौज़ा: युद्ध के प्रभावों से उबरने में कितना समय लगता है? अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्या अपेक्षा की जाती है?
मौलाना साजिद रज़वीः युद्ध के प्रभाव कभी‑कभी कई वर्षों तक बने रहते हैं। नष्ट हुए ढाँचे का पुनर्निर्माण, अर्थव्यवस्था की बहाली और सामाजिक स्थिरता के लिए लंबे और निरंतर प्रयासों की आवश्यकता होती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपेक्षा की जाती है कि वह मानवीय आधार पर प्रभावित लोगों की सहायता करे और शांति की स्थापना के लिए गंभीर प्रयास करे।
हौज़ाः इस जंग का क्या नतीजा दिखाई दे रहा है?
मौलाना साजिद रज़वीः पूरी दुनिया इस समय ईरान के न्याय और सच्चाई और बहादुरी की प्रशंसा कर रही है। युद्ध के दूसरे ही दिन ईरान ने इस जंग को जीत लिया था और अभी तक कंट्रोल उसी के हाथ में है अमेरिका जंग से बाहर भागने का रास्ता ढूंढ रहा है। जो दिख रहा है वो यह है कि ईरान ने युद्ध जीत लिया है।
आपकी टिप्पणी